ब्रेनहैप और आईआईटी बॉम्बे ने किया न्यूरोकैल्म 42 का शुभारंभ — छात्रों के लिए अग्रणी ब्रेन मैपिंग तकनीक, एआई–ड्रोन–रोबोटिक्स वर्कशॉप में हुआ अनावरण

मुंबई, 23 अगस्त 2025 — शिक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब ब्रेनहैप, आईआईटी बॉम्बे और एयरोबॉट के सहयोग से न्यूरोकैल्म 42 का अनावरण किया गया।

इस अवसर पर माननीय अतिथि श्री सुनील राणे, संस्थापक एवं कुलाधिपति, अथर्वा यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक भागीदार के रूप में सहभागिता की। इस कार्यक्रम ने न्यूरोसाइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और रोबोटिक्स को एक सशक्त भविष्य दृष्टि में पिरोया।
न्यूरोकैल्म 42 का अनावरण
कार्यशाला का केंद्रबिंदु था न्यूरोकैल्म 42 का शुभारंभ — जो कि ब्रेनहैप की क्रांतिकारी ब्रेन-मैपिंग तकनीक है। इसे छात्रों की संज्ञानात्मक क्षमताओं, एकाग्रता स्तर और भावनात्मक संतुलन के विश्लेषण हेतु डिज़ाइन किया गया है।
आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से, ब्रेनहैप की संस्थापक ज्योति गुप्ता के नेतृत्व में विकसित यह समाधान, डिजिटल व्यवधानों और छात्रों की घटती ध्यान क्षमता जैसी चुनौतियों का समयानुकूल उत्तर है।

विशेषज्ञ सत्र
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अज़ीज़ुद्दीन खान, हेड, सायकोफिज़ियोलॉजी लैब, आईआईटी बॉम्बे ने अपने व्याख्यान में मनोविज्ञान, न्यूरोसाइंस और डिजिटल व्यवहार में तीन दशकों के शोध के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में कॉग्निटिव ट्रेनिंग और डिजिटल वेलनेस की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उनके विचारों ने स्पष्ट किया कि ब्रेन-मैपिंग और भावनात्मक संतुलन छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के अनिवार्य उपकरण हैं।

व्यावहारिक अनुभव
कार्यशाला में चर्चाओं से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किए गए। प्रतिभागियों ने माइंड-ट्रेनिंग तकनीकों के माध्यम से रीप्रोग्रामिंग, रीवायरिंग और रीसेटिंग का अभ्यास किया जिससे ध्यान और एकाग्रता में सुधार लाया जा सके।

एयरोबॉट द्वारा आयोजित “बिल्ड एंड फ्लाई योर ओन ड्रोन” सत्र और रोबोटिक्स डेमो ने वास्तविक दुनिया में स्वचालन के अनुप्रयोग दिखाए। वहीं, एआई आधारित शिक्षण उपकरणों और इंटरैक्टिव मॉड्यूल्स ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि कैसे तकनीक शिक्षा को बदल सकती है और प्रदर्शन को बढ़ा सकती है।
संस्थापक का दृष्टिकोण
अपना विज़न साझा करते हुए, ज्योति गुप्ता ने कहा:
“न्यूरोकैल्म 42 केवल तकनीक नहीं है, यह एक आंदोलन है — छात्रों के जीवन में एकाग्रता, शांति और भावनात्मक शक्ति वापस लाने का। न्यूरोसाइंस और एआई को मिलाकर हम स्कूलों और अभिभावकों को यह समझने का अवसर दे रहे हैं कि युवा शिक्षार्थियों का मस्तिष्क कैसे कार्य करता है और कैसे उन्हें संतुलित, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार व्यक्तियों के रूप में विकसित किया जा सकता है।”
निष्कर्ष
दिन का समापन इस गहन संदेश के साथ हुआ कि शिक्षा को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ विकसित होना होगा, ताकि छात्रों को तेज़तर्रार दिमाग और मजबूत दिल मिल सकें।
एआई–ड्रोन–रोबोटिक्स वर्कशॉप न केवल एक नवोन्मेषी उत्पाद का शुभारंभ था, बल्कि यह एक संकल्प भी था — कि न्यूरोसाइंस, एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स का संगम आने वाली पीढ़ियों को अधिक स्वस्थ, बुद्धिमान और भविष्य-तैयार बनाएगा




